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भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, CBI जांच और स्वतंत्र जांच समिति की मांग

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भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में CBI जांच, पुलिसकर्मियों पर FIR और स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की गई है।

भोजपुर/आलम की खबर:बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। इस मामले में दायर याचिका में कथित फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से मामले की जांच CBI से कराने, संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच समिति गठित करने की मांग रखी गई है।

यह मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी से जुड़ा हुआ है। एनकाउंटर को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं और अब मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर होने वाली सुनवाई को लेकर बिहार समेत कई जगहों पर नजर बनी हुई है।

वकील विशाल तिवारी ने दायर की है याचिका

भरत भूषण तिवारी मामले में यह याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।

याचिका में केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार के डीजीपी और CBI को पक्षकार बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर किसी मुठभेड़ को लेकर सवाल खड़े होते हैं तो उसकी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

CBI जांच और स्वतंत्र समिति की मांग

याचिका में मांग की गई है कि भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित कर जांच की निगरानी कराने की भी मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है, लेकिन किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने और सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। इसलिए किसी भी कथित एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मामले को लेकर बिहार में सियासी हलचल

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला सामने आने के बाद बिहार में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वहीं कुछ अन्य नेताओं ने भी घटना को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

सोशल मीडिया पर भी यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। लोग एनकाउंटर की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

पूर्व डीजीपी के बयान से बढ़ी चर्चा

इस मामले में बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के बयान के बाद भी चर्चा तेज हुई थी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई थी। उनके बयान के बाद पुलिस कार्रवाई और सरकार की भूमिका को लेकर बहस और बढ़ गई।

हालांकि पुलिस की ओर से पूरे मामले को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। पुलिस का कहना है कि जांच प्रक्रिया के तहत सभी तथ्यों की समीक्षा की जा रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया बयान को लेकर नया मामला

इस बीच भोजपुर पुलिस की ओर से एक अन्य कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है।

पुलिस का आरोप है कि दीपक दीक्षित ने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर पुलिस अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक और धमकी भरे बयान दिए। पुलिस के अनुसार ऐसे बयानों से माहौल खराब करने की कोशिश की गई।

भोजपुर पुलिस कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास पर कार्रवाई की जाएगी।

पहले तत्काल सुनवाई से हुआ था इनकार

जानकारी के अनुसार इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई की तारीख लेने को कहा था। अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले की सुनवाई होने जा रही है।

याचिका में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में FIR दर्ज करने और जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब सबसे ज्यादा नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत इस मामले में क्या दिशा-निर्देश देती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

मामला कानून व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और नागरिक अधिकारों से जुड़ा होने के कारण काफी संवेदनशील माना जा रहा है। सभी पक्षों की नजर अब सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही पर है।

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। किसी भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद निष्पक्ष जांच लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा होती है।

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी। वहीं पुलिस का पक्ष और याचिकाकर्ता की मांग दोनों ही न्यायिक समीक्षा के दायरे में हैं।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो और तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आए। कानून का शासन बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक है।

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